Sawan ki baat

“मेरा सावन है” देखते ही देखते उसे एक साल हो गया। सावन अपने आप में एक जश्न एक उमंग,एक उल्लास एक अलग सी तरंग पैदा करता है,पर इस बार सावन में मेरा मन कुछ उदास सा रहा … इसलिए नहीं की महामारी अभी भी है और ना ही इसलिए कि सावन पूरा सुखा रहा,कारण जो है वह मैं फिलहाल सांझा नहीं कर सकता पर इतना लिख सकता हूं कि एक बार जिंदगी ने फिर परीक्षा ली और फिर उस हकीकत से सामना हुआ जिसके बारे में हमे कभी नही पढ़ाया जाता। इस बार सावन सिर्फ सोमवार को चालू नहीं हुआ था  मेरे लिए सावन बहुत बड़ी मुश्किल के साथ शुरू हुआ था। कभी मुश्किलें बढ़ी तो कभी …कम बिल्कुल नही हुई। पर फिर भी शायद ये महादेव की कृपा है, जो आज मैं कुछ ठीक महसूस कर ये सब लिख रहा हूं। 

सावन अपने आप में त्यौहार है और सावन का सोमवार उस त्योहार  की जान,पर इस बार पूरे सावन मेरी जान अटकी रहीं। सच कहूं तो रविवार को डर लगता था कि कल सोमवार है कुछ ना कुछ तो जरूर होगा। और महादेव की आशीर्वाद से कुछ ना कुछ खटका जरूर होता। पर इस बार पूरा सावन एक नए रूप में निकल गया…इस बार ना  कोई बाहर मिठाई भोग लगी,ना भांग चढ़ी और ना ही फूल माला। इस महामारी ने सचमुच कितना कुछ बदल दिया है…मैं फिर वही बात कहूंगा जिनसे चाह कर दूर होना था उनसे बड़ी आसानी से दूर कर दिया है।जहाँ इस बार सावन ने मुझे डराया,सखी से दूर रखवाया,वही मुझे कुछ सिखाया भी…

 व्रत का अर्थ तो  मैं पिछले साल समझ चुका था पर इस बार यह समझा कि किसी का मन दुखा कर व्रत नहीं करना चाहिए और  इसी के चलते किसी को खुश करने के लिए इस बार मैंने दिन में गेहूं की रोटी खाकर एक नया व्रत करा, व्रत का अर्थ होता है संयम संतुलन खुद पर विजय और खुद पर विजय किसी अपने का दिल दुखा कर नहीं ली जा सकती। खुद के मन को नियंत्रित करना व्रत है पर  किसी के चंचल मन को धैर्य देना भी व्रत से कम नहीं। और महादेव तो इतने भोले है कि हमे खुश देख या हमे किसी और को खुश  करता देख अपने आप प्रसन्न   हो जाते है।

दूसरी बात —  फोन में बहुत नंबर थे,कितने ही ऐसे लोग हैं जो संपर्क में थे पर जब जरूरत थी तो सिर्फ एक ही इंसान काम आया।इस सावन ने मुझे उस इंसान का महत्व बताया जो आधी रात में भी एक फोन पर मेरे साथ खड़ा था। जिंदगी में बहुत मुश्किल और तलाश के बाद एक ऐसा इंसान मिलता है जिसे कभी फोन मिलाने में झिझक ना हो ,इसके बारे मे कभी और चर्चा होगी।

 कुल मिलाकर ये सावन बहुत खतरनाक था,ना मेघ बरसे,ना सखी से नयन मिले, ऊपर से छातीकूटा अलग, पर मन को सिर्फ यही कह कर समझाया कि ये 2020 है… यहाँ कुछ भी संभव है।

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