Dastaan E Siyah

अब जब कभी कहीं से ज्योति दूर होती है ..तो मेरा मन मुदित होता है

कोई अगर मुझसे पूछे कि मुझे अमावस की रात पसंद है या फिर पूर्णिमा की रात तो मैं बेझिझक अमावस की रात चुनूंगा। यह अमावस की ही तो रात है जो मुझे बताती है कि मैं कितने अंधेरे में हूं ,निशा से मेरे रिश्ते कैसे है और जीवन में ज्योति का क्या महत्व है|
मैंने बहुत सोच..सोच की रोशनी का त्यौहार है,आतिश पर लिखू, आतिशबाजी पर लिखू, मिठाई पर लिखू, सफाई पर लिखू, पर पल दो पल की ज्योति और उसके बाद के अंधेरे ने मुझे अपनी ओर खींच लिया।
इस बार अमावस की रात मेंरे लिए बेहद खास रातों में से एक है सिर्फ इसलिए नहीं क्योंकि यह एक जश्न है त्यौहार है बल्कि इसलिए भी क्योंकि इस रात हर एक हवा का झोंका कहीं किसी अंधेरे से ज्योति छिनेगा|  और जब कहीं किसी से ज्योति दूर होती है तो वह पल मुझे बहुत अच्छा लगता है|
इस रात हम पूरी  कोशिश करते हैं कि जितना हम से हो सके उतनी रोशनी फैला सकें| पर सच्चाई यह है कि अंधेरा रोशनी पर बहुत हावी होता है| देखो ना एक दिया कितनी देर तक अंधेरे से लड़ेगा अंत मे तो ज्योति को सियाह में ही शरीक होना है|

   मेरे हिस्से का अंधेरा

यह दिन यह रात… कितना खुश मिजाज माहौल है| और हो भी क्यों ना त्यौहार इतना बड़ा है हर तरफ चमक हर तरफ आतिश हर तरफ फूल गुलदस्ते हर तरफ रोशनी हर तरफ ज्योति पर एक जगह ऐसी भी है जहां आज के दिन भी हर तरफ उदासी गम तन्हाई मातम का माहौल है| हैरान होने की बात नहीं यह जगह आज हर उस शख्स के अंदर है जो आज मुस्कराके किसी से बात कर रहा है ,जो बन ठन के बाजार में घूम रहा है ,जो किसी को झूठी शुभकामनाएं दे रहा है और जो किसी ज्योति के बिना बैठा है| सच्चाई यही है… और मैं इसे भली-भांति देखा भी है हम अंधकार में है| कहीं कोई हमसे उदास बैठा है तो कहीं पास ही मुझसे कोई नाराज बैठा है, कोई इतना नजदीकी से भी मेरी जिंदगी से नहीं जुड़ा पर वह फिर भी मेरी खुशियों  पर नियंत्रण करें बैठा है| कितनी आसानी से कोई व्यक्ति हमारे अंदर अपना भय बिठा देता है| कितनी आसानी से एक ऐसा शख्स जो हमारे बेहद करीब है एक ऐसा शख्स जो रात दिन हमारे साथ है हमारे हिस्से की खुशी हमारे हिस्से की मुस्कुराहट सब पर काबू पा लेता है और हम चाह कर भी कुछ नहीं कर पाते| कितनी आसानी से वह शख्स हमारे हिस्से की आतिश हमारे हिस्से की ज्योति हमसे छीन लेता है और हमें फिर उस गहरे काले अंधेरे में ढकेल देता है|

वैसे तुम्हें बड़ा सकारात्मक प्रवृत्ति का व्यक्ति हूं,प्यार मेरे हर ब्लॉग में झलकता है पर इसका यह मतलब नही कि मैं ज्योति के चक्कर में सियाह को भूल जाऊं| मेरी ही नहीं यह कहीं ना कहीं हर किसी की सच्चाई है ज्योति हमारे पास है,हमारे बेहद करीब है, पर एक काला अंधेरा हमारे भीतर भी है, एक ऐसा अंधेरा  जो हमारे एक बहुत अजीज ने हमें  तोहफे में दिया है|

मैं क्या लिख रहा हु
मैं किसे ये बताना चाहता हु,
देखना क्या है अब
सियाह में ही जिंदगानी,
एक दिन ये भी देखना
ज्योति भी मिल जानी,
पर आज ये मेरी बातें
हर किसी के ऊपर से जानी।

शुरुआत में मुझे ताज्जुब होता था मेरी हालात पर जैसे मैंने लिखा– “अब जब कहीं से ज्योति दूर होती है तो मेरा मन मुदित होता है” इसमें शर्माने या घबराने की कोई बात नहीं है| नहीं लिखी ज्योति हमारे नसीब में हम सब अंधेरे में ही तो बैठे हैं। जैसा मैं हु वैसे ही सब है। हर किसी के यही हालात है,अपनी जिंदगी से झूझ रहे हैं ,जिन्हें पसंद भी नहीं करते उन लोगों से मुस्कुरा कर बतिया रहे हैं,रिश्ते टूट ना जाए सिर्फ इसके शुभकामनाएं दे रहे हैं, व्यस्त होने का झुठा दिखावा कर रहे है,अमन और शन्ति के लिये गलत बात भी सहन कर रहे है। हम तो इतने गहरे काले अंधेरे में है कि अब हल्की सी लौ भी मुझे सूर्य की रोशनी के समकक्ष लगती है।

यह आतिशी ये आवाज ये चमक ये चहलकदमी और यह ज्योति… सिर्फ पल भर की है ,पर मैं यह कोशिश भी तो नहीं कर सकता की इस अंधेरे को खुद से हटा सकूं यह  मेरी जिंदगी का अहम हिस्सा है। जो मुझे हर सांस ये याद दिलाता रहता है कि मैं ज्योति के बिन जी रहा हूं और मैं उसके बिना भी निशा गुजार सकता हूं|

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